The Weight of a Look
By Bengal Tiger Photography

हम मध्य भारत की चिलचिलाती गर्मी में घंटों इंतज़ार कर रहे थे। जंगल में सन्नाटा पसरा हुआ था, बस कभी-कभार दूर से आती किसी लंगूर की चेतावनी भरी आवाज़ सुनाई दे रही थी। फिर, बिना किसी चेतावनी के, वह प्रकट हुई—ऊँची घास से ऐसे निकली मानो हवा पर उसका ही अधिकार हो। वह रुकी और सीधे मेरी ओर देखने लगी। न डर से, न आक्रामकता से—बस एक लंबी, स्थिर निगाह, मानो कह रही हो, "मैं जानती हूँ तुम यहाँ हो।" हल्की, सुनहरी रोशनी धूल और पत्तों से छनकर आ रही थी। मुझे याद है मैंने अपनी साँस रोक ली थी, उस पल की खामोशी को तोड़ना नहीं चाहता था। वह पल किसी तस्वीर से ज़्यादा एक बातचीत जैसा लग रहा था। बाद में, जब वह वापस छाया में गायब हो गई, मैं वहाँ काफी देर तक बैठा रहा, बस हवा की आवाज़ सुनता रहा। ये वो मुलाक़ातें हैं जो मुझे याद दिलाती हैं कि मैं ये सब क्यों करता हूँ—तस्वीर के लिए नहीं, बल्कि किसी जंगली प्राणी द्वारा देखे जाने की याद के लिए।